~ 3डी-प्रिंटेड टाइटेनियम इम्प्लांट का प्रयोग करके चेस्ट को रीबिल्ट किया ~
Report by: Tushar
मुंबई, 13 मार्च 2026: एक दुर्लभ और बेहद जटिल सर्जरी करते हुए नानावटी मैक्स सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल के डॉक्टरों ने मरीज के सीने में से दिल के आकार का बड़ा कैंसरस बोन ट्यूमर सफलतापूर्वक निकाला है। इस ट्यूमर को हटाने के बाद टीम ने मरीज के शरीर को ध्यान में रखकर विशेषरूप से तैयार किए गए 3डी-प्रिंटेड टाइटेनियम इम्प्लांट की मदद से मरीज के सीने का रीबिल्ट किया है।
मुंबई की 41 वर्षीय फिटनेस ट्रेनर को अपने सीने में अप्रत्याशित सूजन जैसी लग रही थी। इमेजिंग और बायोप्सी के बाद पता चला कि उन्हें ग्रेड2 कॉन्ड्रोसारकोमा था। यह हड्डियों के कैंसर का एक प्रकार है। डॉ. मनीष अग्रवाल इस केस को देख रहे थे। स्कैन में सामने आया कि यह ट्यूमर स्टर्नम (ब्रेस्टबोन) से उभरते हुए नजदीकी रिब्स तक पहुंच गया था। इस तरह के कैंसर के मामले में कीमोथेरेपी या रेडिएशन से बहुत अच्छे नतीजे नहीं मिलते हैं। ऐसे में प्रभावी इलाज के लिए सर्जरी करते हुए ट्यूमर को पूरी तरह हटाना ही विकल्प होता है।

सर्जरी को ऑर्थोपेडिक ऑन्कोसर्जरी के वाइस चेयरमैन एवं लीड- इनोवेशंस डॉ. मनीष अग्रवाल और थोरेसिक सर्जरी के प्रिंसिपल डायरेक्टर डॉ. जॉर्ज करिमुंडकल के नेतृत्व में अंजाम दिया गया। इसमें प्लास्टिक एवं रीकंस्ट्रक्टिव सर्जन समेत मल्टीडिसिप्लिनरी टीम ने सहयोग किया। कैंसर को पूरी तरह से हटाने के लिए सर्जिकल टीम को सेंट्रल स्टर्नम को पूरी तरह अलग करना पड़ा। साथ ही कई रिब्स के हिस्सों को भी काटा गया। इससे चेस्ट वॉल में बड़ी खाली जगह बन गई थी। इस गैप को रीबिल्ट करना न केवल दिल एवं फेफड़े की सुरक्षा के लिए जरूरी था, बल्कि मरीज को सामान्य सांस लेने और आसानी से चलने-फिरने में सक्षम बनाने के लिए भी यह जरूरी था।
मेश और सीमेंट जैसे पुराने मैटेरियल्स के बजाय टीम ने मरीज के शरीर को ध्यान में रखकर 3डी-प्रिंटेड टाइटेनियम इम्प्लांट तैयार किया। इसे भारत में ही हाई-प्रिसिजन टेक्नोलॉजी की मदद से तैयार किया गया था। पूरी प्रक्रिया हॉस्पिटल के ही 3डी लैब में की गई। आमतौर पर जटिल सर्जिकल प्लानिंग और मरीजों की जरूरत के हिसाब से इम्प्लांट के लिए इस लैब का प्रयोग होता है। इस इम्प्लांट में कुल नौ टुकड़े प्रयोग किए गए। इनमें से टुकड़ा ब्रेस्टबोन के लिए और आठ टुकड़े रिब्स के लिए प्रयोग किए गए। इन सभी को बची हुई रिब्स और ब्रेस्टबोन के साथ पेंच की मदद से फिट किया गया, जिससे उनके सीने को नैचुरल शेप में लाना संभव हुआ और सांस लेने के दौरान सामान्य मूवमेंट सुनिश्चित हुई। सभी टाइटेनियम रिब को मरीज की रिब के हिसाब से डिजाइन किया गया था। इन्हें लैटिस स्ट्रक्चर में तैयार किया गया, जिससे सभी बोन कॉन्टैक्ट एरिया में ग्रोथ को सपोर्ट मिले। इम्प्लांट को पुणे के ‘3डी इनक्रेडिबल’ ने मैन्यूफैक्चर किया था।
रीकंस्ट्रक्शन को प्रोलीन मेश और सीने के दोनों तरफ की मसल्स से कवर किया गया, जिससे इम्प्लांट को मजबूत सुरक्षा मिल सके। सर्जरी के बाद मरीज की रिकवरी तेजी से हो रही है और वह सामान्य तरीके से सांस लेना और चलना-फिरना कर पा रही हैं।
इस मामले को लेकर ऑर्थोपेडिक ऑन्कोसर्जरी के वाइस चेयरमैन एवं नानावटी मैक्स सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल के लीड- इनोवेशंस डॉ. मनीष अग्रवाल ने कहा, ‘ब्रेस्टबोन में ट्यूमर का मामला दुर्लभ होता है। इस मामले में कैंसर दिल और फेफड़े के एकदम नजदीक था। इसलिए इसे हटाना और भी चुनौतीपूर्ण था। ट्यूमर को हटाने के बाद चेस्ट को रीबिल्ट करना उससे भी बड़ी चुनौती थी। मरीज को सही से सांस लेने में सक्षम बनाने औैर प्रमुख अंगों की सुरक्षा के लिए यह रीकंस्ट्रक्शन जरूरी था। कस्टम 3डी-प्रिंटेड इम्प्लांट से हमें मरीज के सीने को लगभग पहले जैसा ही बनाने में सफलता मिली। इस तरह का रीकंस्ट्रक्शन दुनियाभर में दुर्लभ है। विशेषरूप से मरीज को ध्यान में रखकर मल्टी-पीस डिजाइन के माध्यम से रीकंस्ट्रक्शन के कम ही मामले देखे गए हैं।’
नानावटी मैक्स सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल के प्रिंसिपल डायरेक्टर- थोरेसिक सर्जरी डॉ. जॉर्ज करिमुंडकल ने कहा, ‘ब्रेस्टबोन और रिब की भूमिका सांस लेने में बहुत अहम होती है। अगर इसे सही तरीके से रीकंस्ट्रक्ट नहीं किया जाए तो मरीज को bसांस लेने में मुश्किल का सामना करना पड़ सकता है। इस इम्प्लांट के डिजाइन से जो सुरक्षा एवं फंक्शनिंग संभव हुई है, पुराने तरीके से वैसा संभव नहीं होता है।’
यह मामला दिखाता है कि कैसे एडवांस्ड सर्जिकल तकनीकों और विभिन्न विभागों की टीम की मदद से डॉक्टरों के लिए दुर्लभ कैंसर के मामलों में सुरक्षित एवं ज्यादा प्रभावी तरीके से इलाज देना संभव हुआ है।
