शिक्षा जगत में गौरव का क्षण

यूपी व सीबीएसई पाठ्यक्रम में डॉ. निशा अग्रवाल की रचनाओं को मिला स्थान

डॉ. शंभु पंवार

नई दिल्ली, 19 मार्च।

शिक्षा जगत के लिए यह अत्यंत गौरवपूर्ण क्षण है कि जयपुर की प्रख्यात शिक्षाविद् एवं पाठ्यपुस्तक लेखिका डॉ. निशा अग्रवाल की रचनाओं को माध्यमिक शिक्षा परिषद, उत्तर प्रदेश के नवीन पाठ्यक्रम के अंतर्गत कक्षा 9 से 12 की सामान्य हिंदी पाठ्यपुस्तकों में शामिल किया गया है। साथ ही, सीबीएसई बोर्ड की कक्षा 9 एवं 10 की हिंदी व्याकरण पुस्तकों में भी उनकी विषयवस्तु को स्थान मिला है।

    नगीन प्रकाशन द्वारा प्रकाशित इन पुस्तकों का संपादन वरिष्ठ लेखक सर्वेश कांत वर्मा ने किया है। इन पाठ्यपुस्तकों में डॉ. अग्रवाल के निबंध, गद्यांश, पद्यांश, संस्मरण एवं विविध शैक्षणिक सामग्री को सम्मिलित किया गया है, जो विद्यार्थियों के लिए अत्यंत उपयोगी सिद्ध हो रही है।

   डॉ. निशा अग्रवाल के चर्चित निबंध ‘नई शिक्षा नीति’ और ‘शिक्षित बेरोजगारी’ समकालीन शिक्षा व्यवस्था के महत्वपूर्ण पहलुओं को सरल, सटीक और प्रभावशाली भाषा में प्रस्तुत करते हैं। इन रचनाओं में नई शिक्षा नीति के उद्देश्य, स्वरूप, प्रभाव एवं चुनौतियों का समग्र विश्लेषण किया गया है, वहीं शिक्षित बेरोजगारी की समस्या और उसके समाधान पर भी गहन दृष्टिकोण प्रस्तुत किया गया है।

  उल्लेखनीय है कि डॉ. अग्रवाल अब तक 30 से अधिक पुस्तकों का सृजन कर चुकी हैं। उनकी कृतियों में सीबीएसई पाठ्यक्रम के अंतर्गत कक्षा 3 से 5 तक की अंग्रेज़ी एवं विज्ञान की पुस्तकें भी शामिल हैं। इसके अतिरिक्त ‘Evolution of Indian Education’, ‘समावेशी शिक्षा’, ‘शिक्षा का बदलता स्वरूप’, ‘कला शिक्षा’, योग शिक्षा एवं बाल शिक्षा में नवाचार जैसे विषयों पर आधारित उनकी पुस्तकें शिक्षा जगत में विशेष स्थान रखती हैं।

उन्होंने सेंट्रल यूनिवर्सिटी ऑफ गुजरात के सामाजिक विज्ञान विभागाध्यक्ष प्रो. डॉ. जनक सिंह मीणा के निर्देशन में एक महत्वपूर्ण शोध ग्रंथ भी तैयार किया है। साथ ही उनकी कृति ‘सौहार्द शिरोमणि संत सौरभ पांडेय’ एक प्रेरक जीवनी के रूप में उनकी बहुआयामी लेखन क्षमता को दर्शाती है।

धौलपुर जिले के बाड़ी (पिपरेट) निवासी जगदीश प्रसाद मंगल की सुपुत्री डॉ. निशा अग्रवाल शिक्षा के क्षेत्र में निरंतर सक्रिय हैं। नई शिक्षा नीति के अंतर्गत प्रारंभ किए गए इंटीग्रेटेड टीचर एजुकेशन प्रोग्राम (ITEP) पर उनकी चार पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं, जो शिक्षक शिक्षा के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान मानी जा रही हैं।

डॉ. निशा अग्रवाल का यह योगदान न केवल शिक्षा जगत के लिए प्रेरणास्रोत है, बल्कि विद्यार्थियों को ज्ञान, जागरूकता और सामाजिक सरोकारों की दिशा में मार्गदर्शन भी प्रदान कर रहा है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

error: Content is protected !!