भारतीय संगीत को नई पहचान दे रहे हैं डॉ. रतिश तागडे

मुंबई, 26 मार्च 2026: भारतीय शास्त्रीय संगीत की समृद्ध परंपरा हजारों वर्षों पुरानी है। बदलते समय के साथ यह संगीत लगातार नए रूपों में सामने आता रहा है। इसी संदर्भ में प्रख्यात वायलिन वादक और सेंटर फॉर रिसर्च एंड प्रमोशन ऑफ़ इंडियन म्यूजिक (सीआरपीआईएम) के अध्यक्ष डॉ. रतिश तागडे भारतीय शास्त्रीय संगीत को आधुनिक तकनीक और नई पीढ़ी से जोड़ने के लिए कई महत्वपूर्ण पहल कर रहे हैं।

डॉ. तागडे इससे पहले भारत का पहला 24-घंटे का शास्त्रीय संगीत चैनल “Insync” स्थापित कर चुके हैं। उस समय यह एक अनोखी पहल मानी गई थी, क्योंकि शास्त्रीय संगीत के लिए समर्पित प्रसारण मंच उपलब्ध नहीं था। इस चैनल के माध्यम से देश और दुनिया के श्रोताओं तक लगातार शास्त्रीय संगीत पहुँचाने का प्रयास किया गया।

इसी दिशा में उन्होंने सीआरपीआईएम की स्थापना की। इस संस्था का उद्देश्य भारतीय संगीत के अध्ययन, शोध और प्रचार-प्रसार को संस्थागत स्वरूप देना है। सीआरपीआईएम के अंतर्गत चल रहे बैठक नेटवर्क के माध्यम से शास्त्रीय संगीत की अंतरंग बैठकों की परंपरा को पुनर्जीवित करने का प्रयास किया जा रहा है, जहाँ कलाकार और श्रोता के बीच सीधा संवाद संभव होता है।

तकनीकी बदलावों के इस दौर में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) भी संगीत के क्षेत्र में प्रवेश कर चुकी है। डॉ. तागडे का मानना है कि भारतीय शास्त्रीय संगीत की आत्मा राग विस्तार और इम्प्रोवाइज़ेशन में है। पाश्चात्य शास्त्रीय संगीत जहाँ लिखित शीट म्यूजिक पर आधारित होता है, वहीं भारतीय संगीत गुरु-शिष्य परंपरा से विकसित हुआ है। ऐसे में एआई को एक “डिजिटल शिष्य” की तरह देखा जा सकता है।

डॉ. तागडे ने स्विस स्कुल ऑफ़ बिजनेस एंड मैनेजमेंट, स्विट्ज़रलैंड से डॉक्टरेट किया है। उनका शोध विषय था कि डिजिटल स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म के माध्यम से पारंपरिक संगीतकारों के लिए बेहतर राजस्व मॉडल कैसे विकसित किए जा सकते हैं।

आज जेन जी पीढ़ी मोबाइल और स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म के माध्यम से संगीत सुनती है। दिलचस्प बात यह है कि कई युवा सोशल मीडिया पर शास्त्रीय संगीत की रील्स बनाते हुए भी दिखाई देते हैं।

डॉ. तागडे का मानना है कि भारतीय शास्त्रीय संगीत ने इतिहास में कई बदलावों के बावजूद अपनी मौलिकता और प्रामाणिकता को हमेशा सुरक्षित रखा है। यदि परंपरा और तकनीक के बीच संतुलन बनाए रखा जाए, तो यह संगीत भविष्य में और अधिक व्यापक रूप से दुनिया तक पहुँचेगा।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

error: Content is protected !!