बिना अंगूठे के जन्मी बच्ची की नानावटी मैक्स हॉस्पिटल में हुई दुर्लभ टो-टू-हैंड सर्जरी

मुंबई, 15 अप्रैल 2026: रेयर रीकंस्ट्रक्टिव माइक्रोसर्जरी के मामले में उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल करते हुए नानावटी मैक्स सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल, मुंबई के डॉक्टरों ने नागपुर की 11 महीने की बच्ची के हाथों की फंक्शनिंग को रीस्टोर किया है। बच्ची जन्म से ही बिना अंगुठे के पैदा हुई थी। उसका बायां अंगूठा एकदम नहीं था और दायां अंगूठा भी सही से विकसित नहीं था। एक कॉम्प्लेक्स टू-स्टेज रीकंस्ट्रक्टिव सर्जरी से बच्ची के हाथों की फंक्शनिंग को सामान्य करने में मदद मिली है, जिससे वह सामान्य जीवन जीने में सक्षम होगी।

हड्डी एवं मांसपेशियों के न होने के कारण बच्ची का बायां अंगूठा बिलकुल नहीं बना था और दायां अंगूठा अविकसित था। ऐसे में उसके लिए चीजों को पकड़ने और दबाने जैसी मोटर स्किल्स मुश्किल हो गई थीं। कई जगह से बातचीत के बाद परिवार के लोगों को नानावटी मैक्स सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल के डायरेक्टर – प्लास्टिक, रीकंस्ट्रक्टिव माइक्रोसर्जरी एंड हैंड ट्रांसप्लांटेशन डॉ. नीलेश सतभाई के बारे में पता चला और उन्होंने उनसे संपर्क किया।

स्थिति को देखते हुए डॉ. सतभाई और उनकी टीम ने मल्टी-स्टेज सर्जिकल प्लान तैयार किया। पहले उन्होंने जॉइंट्स को स्थिर करते हुए मौजूदा दाएं अंगूठे को रिपेयर किया और उसकी मूवमेंट एवं अन्य अंगुलियों को छूने की क्षमता को रीस्टोर करने के लिए हथेली से मांसपेशियां ट्रांसफर कीं। सफल सर्जरी के बाद बच्ची को सपोर्टिव स्प्लिंट में रखा गया और 6 से 8 हफ्ते में उसने प्रभावी तरीके से दाएं अंगूठे का इस्तेमाल शुरू कर दिया। दो महीने बाद डॉ. सतभाई ने सेकेंड स्टेज सर्जरी का प्लान किया। इस स्टेज में बायां अंगूठा बनाने के लिए माइक्रोवस्कुलर टो-टू-हैंड ट्रांसफर किया गया। पश्चिमी भारत के कुछ चुनिंदा अस्पतालों में ही ऐसी एडवांस्ड सर्जरी की व्यवस्था है। डॉ. सतभाई और उनकी टीम ने बाएं पैर की दूसरी अंगुली को उसके टेंडन, नर्व और ब्लड वेसल्स समेत हाथ में ट्रांसफर किया। उनकी टीम ने सावधानी पूर्वक सबकुछ रिपेयर किया, जिससे सर्कुलेशन, सेंसेशन और फंक्शन सभी कुछ रीस्टोर किया जा सका। जिस पैर से अंगुली ट्रांसफर की गई, उसे भी इस तरह से रीकंस्ट्रक्ट किया गया, जिससे उसका फंक्शन नॉर्मल रहे।

रीकंस्ट्रक्ट किया गया अंगूठा चार से छह हफ्ते में काम करने लगेगा। इसके लिए स्ट्रक्चर्ड फिजियोथेरेपी कराई जा रही है, जिससे स्ट्रेंथ, मोबिलिटी और न्यूरल एडेप्टेशन हो सके।

अंगूठे के महत्व को बताते हुए डॉ. समभाई ने कहा, ‘हाथ का 40 प्रतिशत काम अंगूठे पर निर्भर रहता है। सभी अंगुलियों को छू सकने की इसकी क्षमता के कारण मनुष्य जटिल काम भी आसानी से कर पाता है। अंगूठे के बिना पैदा होना दुर्लभ मामला है। एक लाख में किसी एक बच्चे को ऐसी परेशानी होती है। लेकिन अगर सही समय पर कदम न उठाए जाएं तो जीवनभर के लिए अपंगता हो सकती है।’

ऑपरेशन के बाद की प्रक्रियाओं का महत्व बताते हुए डॉ. सतभाई ने कहा, ‘असली चुनौती सर्जरी के बाद शुरू होती है। बच्चे को ट्रेनिंग देनी पड़ती है, ताकि उसका दिमाग नए बनाए गए अंगूठे को पहचानना और उसका इस्तेमाल करना सीखे। सही समय पर कदम उठाए जाएं और फिजियोथेरेपी हो, तो ऐसे बच्चे पूरी तरह सामान्य जीवन जी सकते हैं।’

ऐसी सर्जरी में बहुत ज्यादा विशेषज्ञता की जरूरत होती है, इसलिए कम ही जगहों पर ऐसी रीकंस्ट्रक्शन सर्जरी होती है। भारत में सालभर में कुछ ही ऐसे मामले देखे जाते हैं। यह सफल सर्जरी इस तरह के मामलों में सही समय पर जांच, इलाज और स्पेशलाइज्ड मल्टी डिसिप्लिनरी एप्रोच का महत्व दिखाती है।

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